समुद्र तल से मिले जीवों का नमूना जुटाना पहला काम है; उसकी सही पहचान और वैज्ञानिक रिकॉर्ड बनाना अगला। इसी काम में शोधकर्ताओं को प्रशिक्षित करने के लिए कोच्चि के CMLRE में 7 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम शुरू हुआ। इसकी अवधि 11 सितंबर तक तय की गई थी।

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की 9 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 30 शुरुआती करियर के शोधकर्ता और वैज्ञानिक इसमें शामिल थे। भारत के साथ दक्षिण अफ्रीका, केन्या, बांग्लादेश, मॉरीशस और हिंद महासागर क्षेत्र के अन्य देशों से भागीदारी रही।

लैब से खुले डेटा तक

पाठ्यक्रम में समुद्र तल के नमूने जुटाना, प्रयोगशाला में बड़े तलवासी जीवों की पहचान और परिणाम लिखना शामिल था। DNA बारकोडिंग, इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी तथा जैवविविधता डेटा के विश्लेषण का प्रशिक्षण भी रखा गया।

कार्यक्रम में नमूनों को वैज्ञानिक संग्रह के लिए तैयार करने और खुले तौर पर उपलब्ध जैवविविधता डेटा प्रकाशित करने की कार्यशालाएं शामिल थीं। आयोजन पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के CMLRE, International Seabed Authority, IORA और दक्षिण कोरिया के MABIK के सहयोग से हुआ।

एक नजर में

  • कोच्चि में कार्यक्रम की अवधि 7–11 सितंबर 2026।
  • लगभग 30 युवा वैज्ञानिक और शोधकर्ता शामिल।
  • जीवों की पहचान, DNA बारकोडिंग और खुले डेटा पर प्रशिक्षण।

स्रोत और संदर्भ

  1. पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय / PIB · Deep-sea Macrofauna Taxonomy School at CMLRE ↗9 सितंबर 2026

प्राथमिक स्रोतों पर आधारित संपादित लेख। स्रोत जाँच: 15 सितंबर 2026।

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