बुरहानपुर की मावा जलेबी आम जलेबी से अलग दिखाई देती है। छल्ले मोटे हैं, रंग गहरा और अंदर की बनावट ज्यादा भरी हुई। फर्क बनाने में इस्तेमाल होने वाले मावे का है। दूध को गाढ़ा करके बने मावे से इस मिठाई को उसका खास स्वाद और बनावट मिलती है।
मध्यप्रदेश पर्यटन ने 7 सितंबर को निमाड़ी खानपान पर अपने परिचय में मावा जलेबी को खास तौर पर बुरहानपुर से जोड़ा है। जहां सामान्य जलेबी में खमीर उठा आटे या मैदे का घोल इस्तेमाल होता है, यहां मुख्य पहचान मावे की है।
कड़ाही से चाशनी तक
मावे के मिश्रण से मोटे छल्ले बनाए जाते हैं। तलने के बाद इन्हें गरम चाशनी में डुबोया जाता है। बाहर की हल्की कुरकुरी परत और भीतर का नरम हिस्सा साथ रहते हैं। यही बनावट इसे पतली, कड़क जलेबी से अलग करती है।
निमाड़ की मिठाई की थाली में लवंग लतिका भी दर्ज है—नारियल और मेवों की भरावन वाला पकवान, जिसे मोड़कर लौंग से बंद किया जाता है। मावा जलेबी और लवंग लतिका, दोनों दिखाती हैं कि एक ही चाशनी अलग-अलग बनावट के साथ कैसे बदल जाती है।
एक नजर में
- मावा यानी खोया इसकी मुख्य पहचान है।
- मोटे छल्ले तलकर गरम चाशनी में डाले जाते हैं।
- मध्यप्रदेश पर्यटन ने इसे बुरहानपुर के खानपान से जोड़ा है।
स्रोत और संदर्भ
- मध्यप्रदेश पर्यटन · Nimari Cuisine ↗7 सितंबर 2026
प्राथमिक स्रोतों पर आधारित संपादित लेख। स्रोत जाँच: 15 सितंबर 2026।

