बुरहानपुर में पानी की एक कहानी जमीन के नीचे चलती है। कुंडी भंडारे की व्यवस्था में सतपुड़ा की ओर से आता भूजल संग्रह करने वाले भंडारों में जुटता है और भूमिगत रास्तों से शहर की ओर बढ़ता है। जिला प्रशासन इसे लगभग 400 साल पुरानी जल-व्यवस्था के रूप में दर्ज करता है।

इसके निर्माण की कहानी अब्दुर्रहीम खान-ए-खाना से जुड़ी है। जिला प्रशासन के विवरण के मुताबिक, शहर से छह किलोमीटर से अधिक दूर सतपुड़ा की तलहटी में पानी के स्रोत को देखकर उसे बुरहानपुर तक लाने की योजना बनी। इसके लिए सुरंगें और भूजल एकत्र करने वाले रास्ते बनाए गए।

शहर की विरासत में पानी की जगह

रहीम का नाम दोहों के कारण घर-घर जाना जाता है। बुरहानपुर में वही नाम पानी के प्रबंध से भी जुड़ता है। यहां की ऐतिहासिक जल-व्यवस्था दिखाती है कि पुराने शहरों का निर्माण केवल किलों और महलों तक सीमित नहीं था; पानी पहुंचाना भी बड़ी नगर-योजना का हिस्सा था।

मध्यप्रदेश पर्यटन भी कुंडी भंडारे को मुगलकालीन जल-परिवहन की उल्लेखनीय व्यवस्था में गिनता है। जिला प्रशासन इसके कुछ हिस्सों से आज भी शहर को पानी मिलने का उल्लेख करता है। पानी की वर्तमान गुणवत्ता या आपूर्ति की मात्रा का दावा इस परिचय में नहीं किया जा रहा है।

एक नजर में

  • लगभग चार सदियों पुरानी भूमिगत जल-व्यवस्था।
  • अब्दुर्रहीम खान-ए-खाना से जुड़ा निर्माण इतिहास।
  • सतपुड़ा की तलहटी से भूजल संग्रह और परिवहन का तंत्र।

स्रोत और संदर्भ

  1. जिला प्रशासन, बुरहानपुर · Kundi Bhandara ↗प्रकाशन-तिथि उपलब्ध नहीं
  2. मध्यप्रदेश पर्यटन · Burhanpur — Kundi Bhandara ↗प्रकाशन-तिथि उपलब्ध नहीं

प्राथमिक स्रोतों पर आधारित संपादित लेख। स्रोत जाँच: 15 सितंबर 2026।

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